शीघ्रता पसंद श्री साब ने चले जाने में भी शीघ्रता ही दिखाई गहरी मौन आवाजों से मेरा राबता न था न है लेकिन एक आवाज अब भी सिहरन पैदा करती है ऐसा लगने लगता है जैसे अगले ही क्षण मैं मिट्टी के ढेले की भांत भरभरा कर चूर हो जाऊंगा । वो आवाज है - क्या बात करते है भाईसाहब..? या फिर बकवास मत कर मुझे पता है तू क्या है...? ये स्नेह मुझे विरासत में मिला है । इसकी विरासत की विराटता भी बड़ी अद्भुत है ।जी मचल जाए तो आप साब के पास जाकर बैठ जाइए वहां आपको वो सब कुछ मिलेगा जो जीवन जीने को कारगर हो । मुझे ठीक से याद है कि अखे सिंह जी साब का प्रेम अतुलनीय था । वे मजदूरों से लेकर अनजान बच्चों तक के लिए उपलब्ध थे । श्री साब का चले जाना एक सरंक्षक का चले जाना भर नही है । एक युगांत नायक का चले जाना है जिसने अपने कर्म - कौशल और जीवन पद्धति से सैकड़ों-करोड़ो लोगों के दिल जीतने का हुनर दिखाया है । प्रिय किशन के साथ साहब उनतीस अगस्त को भी हमने उस स्नेही- आँचल की सौरभ को महसूस किया था ।देर रात तक चली यह गोष्ठी कौन जानता था अंतिम होगी ।हमने ठहाके लगाए थे,ढ...