अपना बाड़मेर
मीनाक्षी,सूरज और मानसा की नजर में अपना बाड़मेर ____________________________ बाड़मेर यूं भी खुश मिजाज शहर है.यहां की फिजाओं में अमन व चैन का घुलना प्रेम की निशानी है.रुमानियत आब-ओ-हवा के साथ जहां -तहां फिरती रहती है.यहां का लोक खासा प्रभावी है.लोक की चीजें समय के साथ अपना प्रभाव छोड़ती नजर आती है.ऐसे अदीठे लोक से प्रेम हो होना खुशी भर देता है. मैं एक लंबे समय तक बाड़मेर रहा और उसे जीते समय मुझे हमेशा ही एक पूर्णता का सा आभास हुआ.किसी अनजान पर्यटक अथवा मुझ जैसे यायावर का ये धरती बड़ी बेचैनी से स्वागत करती प्रतीत होती है.यहां के कई प्रवासियों से मिला भी और अनुभव जानने के भी प्रयास किये सब कुछ पॉजिटिव ही बना रहा.यहां के फोटोग्राफर यूं भी अपने काम के लिए मशहूर है लेकिन मुख्यतः मैंने मानसा कंवर राणीगांव और सूरज कंवर सोढा को ही जाना है.ये जानना ऐसा है जो आप संवेदना से जानते है.दोनों ही मेरे लिए पूर्ण अपरिचित है लेकिन बावजूद इसके जब मैं फ़ोटोज में बाड़मेर से प्रेम देखता हूँ तो एकमेक हो जाता हूँ.मुझे किसी विलगता का आभास ही नही हो पाता.कुछ दिन पूर्व तक मुझे ये दो नाम ही ज्ञात थे किंतु तीसरा ...