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हम प्रेम को कहां समझ पाते है

 प्रतिभा से होकर गुजरता हूँ एक तस्वीर आंखों में ठहर जाती है । मन अगर झरने लगे तो मारीना की तस्वीर बना देता है । प्रतिभा की इस पुस्तक को हालांकि मैं पढ़ नही पाया हूँ लेकिन फिर भी मुझे लगता है की इसे मैंने अनुभूत किया है । मारीना के विषय मे बताते समय प्रतिभा संवेदित दिखती है । उनका प्रेम छलक पड़ता है ।कभी -कभी तो प्रतिभा और मारीना एकमेक हो जाती है ।  ओ मेरे प्यारे देश रूस  मत शर्मिंदा हो  हमारे नंगे पैर देखकर  परियां हमेशा नंगे पैर ही होती हैं  बूट पहनकर तो राक्षस आते हैं  जो भी नंगे पैर नहीं है  वह असहनीय है.  उस समय की यह कविता जब रूस अपने सबसे विकट समय से गुजर रहा था । मारीना भी खुद को इससे विलग नहीं रख पाती ।मारीना कविताएँ जीते हुए लिखती है वे चाहती है कि कविता का हर एक शब्द स्वेद से सींचकर लिखा जा सके । गहरी आत्मानुभूति व भयावह मनःस्थिति के बीच का ये दौर रहा होगा जब मारीना ये कविता लिख रही होंगी । ये कविता मारीना की जिजीविषा व संघर्ष दर्शाती है । मारीना विचलित नहीं दिखती।किसी भी छोर से देखकर मारीना के देश प्रेम पर सवाल नहीं उठाए जा सकते । मा...