रेगिस्तानी प्रेम
प्रेम में पड़ा हुआ लड़का रेगिस्तान की रेत पर बैठा अपनी मुट्ठियों में भींचता है रेत तत्काल ही वह प्रेम के साथ छोड़ देता है रेत उसे डर है कि रेत का प्रेम रेत की देह रेत ही की दुनिया रेत में न समा जाए ****** उनींदी आंखों में ख्वाब लिए फूलवाले की सुई रोहिड़े जैसे मखमली फूलों पर मंडराने वाले भंवरो को उड़ा देता है हाथ की चुटकी से चीर डालता है फूल का गर्भ । ******* Add caption रेत के प्रेम में न जाने कितने रेतीले ताजमहल प्रेम की परछाई बने हुई रेत की ही भांत भरभरा कर रेत हो गए ********