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Showing posts from November, 2020

रेगिस्तानी प्रेम

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 प्रेम में पड़ा हुआ लड़का रेगिस्तान की रेत पर बैठा अपनी मुट्ठियों में भींचता है रेत तत्काल ही वह प्रेम के साथ छोड़ देता है रेत  उसे डर है कि  रेत का प्रेम  रेत की देह रेत ही की दुनिया रेत में न समा जाए ****** उनींदी आंखों में ख्वाब लिए फूलवाले की सुई रोहिड़े जैसे मखमली फूलों पर मंडराने वाले भंवरो को उड़ा देता है हाथ की चुटकी से चीर डालता है फूल का गर्भ । ******* Add caption रेत के प्रेम में न जाने कितने रेतीले ताजमहल प्रेम की परछाई बने हुई रेत की ही भांत  भरभरा कर रेत हो गए ********

सुल्ताना

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 गांव के चौराहे से मुख्य गांव शुरू होता है.यहां से लोगो की बस्तियां शुरू हो जाती है.अपने-अपने काम मे लगे लोग.किनारे की दुकान निहाल सिंह की है वैसे भी ये नाम फिट बैठता है यदि ये दुकान न होती तो शायद निहाल भाई इतने निहाल न होते. बीतती उम्र के साथ शादियों के दौर आते है और चले जाते है.पास में ही मयखाना है.शराबघर किसी भी स्थान की रौनक बढ़ा सकते है.यहां आ जाने के बाद आपको सुख मिलने लगता है कारण यह है कि बाहर से आने वाले मजदूर और बावरी जाती के लोग दिन भर शराब के नशे में मुख्य सड़क के उत्तरी भाग में पड़े रहते है.ट्रैक्टर आते है और जमीं खिलती चली जाती है.चौराहे पर अलग - अलग दुकानें ऐसे बनी है जैसे एक ही खेत मे किस्म-किस्म का धान भरा रहता है.क्रमशः अंतिम दुकान है गेमर सिंह की. न जाने क्यों लोग बुट्टा ही कहते है शायद जब बच्चा था तो कान न बींधने दिया हो.शायद.मुख्य सड़क के साथ बस्तियां बढ़ती जाती है और हँसते हुए लोग चलते रहते है.यहां कोई भी आपको कह सकता है 'बीजो'. जिसका अर्थ है कि आपका स्वास्थ्य कैसा है,इन दिनों हालात कैसे है या फिर संबंधित आदमी के काम से मिलता -जुलता कुछ.दुकानें गांव को ऐसे घेर...

एक याद हर याद के बाद बनी रहती है

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 मैं पागल होने लगता हूँ.कोई क्यों न पागल हो जब प्रेम अपने सतरंगी पंख फैलाकर दूर देश मे ले जाने को आतुर हो.ख्याल आते रहते है और उम्मीदें मरती चली जाती हैं. कुछ करने की उम्मीद कुछ भी दूसरा करने से रोके रखती है.ये सब सोचते हुए मैं अचानक आई शीत लहर से कंपन महसूस करता हूँ अगले ही क्षण मैं उठकर धूप में जाता हूँ.बैठे बैठे देखता हूँ गुलमोहर पर नए पत्ते आ गए है.जिन्हें एक गिलहरी बड़े प्रेम से कुतरने का जतन कर रही है.मैं हाथ मुंह पर चिपकाए घुटनो के बल बैठ उसे निहारने लगता हूँ.कुतरना यूं भी तो सुकून ही देता है.लोगों की आवाजें बहरा लोकतंत्र कुतर लेता है और लोग चिल्लाते हुए लगभग मर से जाते है.          अचानक आई आवाज मेरा मौन तोड़ती है.पिताजी की आवाज है.ये आवाज मेरे लिए विश्व की सबसे भयावह आवाजो में से है जिसमे क्रोध और प्रेम का अजीबोगरीब सामंजस्य है.सरपंच के चुनाव गांव में हो गए है और इन दिनों पंचायतीराज चुनाव को लेकर नित नई पंचायते होती रहती है.मैं किसी भी दल का कभी न रहा.न तो किसी पार्टी को अपने ऊपर हावी होने दिया और न ही किसी नेता को सिर चढ़ने दिया.लोग आते रहे और जमघट ब...

प्रेम में होना

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 ऐसे लोग बहुत सच मे बहुत कम होते है जिन लोगों से मिलने से कोफ्त होती है ।वह किसी से मिलता है तो आंखे न मिली होती है। जब अकेले होता है तो तरह-तरह के ख्वाब उसकी चारपाई के पास पसरे रहते थे ।वो हर दम सोचता रहता है कभी ये कभी वो बात बात उसे सबसे ज्यादा डरावनी लगने लगती थी और वह थी प्रेम।उसे लगता था कि प्रेम विद्रोह।प्रेम करना। से आदमी की आदमियत तो बढ़ जाती है किंतु फिर वह आदमी जल्द ही मर भी जाता है ।ऐसा वह इसीलिए कह रहा था क्योंकि उसने बहुत पहले सुना था कि यहां के किसी मकान बनाने वाले मजदूर को किसी शहजादी टाइप की लड़की से प्रेम हो गया था। और इस प्रेम के रंग बड़े अजीब होते थे।ऋतुओं और मौसमों से जो शहजादी के अलावा अपने आपको हमेशा गुलजार रखना जानती थी वो धीरे - धीरे पतझर में झरते पीपल के पत्ते की भांत पीली हो चुकी थी।काजल - भर जाने वाली आँखों में गुस्सा आया था.सम्मोहन और मुस्कान से सजने वाला उसके मुंह पर बेचैनी और बेसब्री उठ आया था।               उसे जब भी लगता है कि प्रेम करना इबादत करना ।वह इस के विषय मे सोचता और अगले ही क्षण प्रेम अपने अपनेतरथी घोड़ों ...

बेसब्री भरे दिन...

 पिछले तीन दिन किसी उदासी लिपटे बीत गए.कोई व्यक्ति है जो मेरे सारे अकाउंट्स के पासवर्ड जानना चाहता है.दिन भर इंस्टा वेरिफिकेशन के टेक्स्ट मैसेज आते है और फोन भरा रहता है.इन मेसेजेज की तादाद इस कदर है कि मैं मिटाने भी बैठूं एक घण्टा उसे मिटाने में लग जाता है.किसी गलती से अगर टेक्स्ट ओपन हो जाये तो पासवर्ड न जाने कैसे उसके पास चले जाते है.जैसे ही यह होता है मैं तुरन्त पासवर्ड चेंज करने को जाता हूँ. मैं सोचने लगता हूँ क्या साइबर क्राइम को कंट्रोल नही किया जा सकता.हालात ये है कि मैं मेरे फोन को लगातार एक घण्टे तक विद आउट फ्लाइट मोड नही रख सकता.कुछ दोस्तों के फोन आने से रह जाते है.घर वालों की बैचेनी बढ़ने लगती है.लेकिन मैं इन सबसे बचकर निकलना चाहता हूँ.न जाने क्यों और न जाने कौन है वो जो मुझसे इस तरह व्यवहार कर रहा है.           कल्पना कीजिये कि आपकी सारी निजता यदि सार्वजनिक हो जाये.यूं तो निजी रूप से सहेजा जाए ऐसा कुछ भी नही है किंतु फिर भी एक चिंता बनी रहती है.मैंने किन दोस्तों से क्या बातें की है,किन हालातों में की है,मैं दिन भर फोन के गूगल को स्क्रोल करते हुए...