उफ़ प्रेम को समझ पाना कितना मुश्किल है
उफ़ प्रेम कितना मुश्किल होता है किसी का होना भुला पाना सच में बेहद मुश्किल भरा काम है. खास कर तब जब श्वांस की फांस फंसी हो. आम जीवन मे कई लोगों को सुनते पढ़ते है लेकिन कुछ की गहरी ख़ुमारी भर आती है जीवन में. उन का खुमार ऐसा होता है कि हम उनको गुनगुना रहे होते है लेकिन एक धक्के के बाद ये हमें पता चलता है.मुझे नहीं मालूम ख़ुमारी और सम्मोहन में कितना अंतर है लेकिन एकमेक जरूर होते होंगे कहीं और मैं सोचता हूँ मैं उसी संगम पर हूँ. किसी रोज दप्पू खान को सुना औऱ वो जस का तस बैठ गया ज़ेहन में. मैं मूमल के विषय मे कुछ सोचूं तो दप्पू खान की स्मृति अनायास आ ठहरे. खाकी कोट पहने बीड़ी पीता हुआ, नाक नुक्स से चितेरा. बस की आखिरी सीट पर बैठा सा. मैं पहली दफा पहचान ही न पाया. पहचानूँ भी भला क्यों. इतना बड़ा गायक यूं बस में भला क्या करेगा ? मेरा ही मन उजड़ा है. न जाने क्यों लगा शायद यही हो. मान जी से पूछा तो कन्फर्म हुआ. इतने में दप्पू खान बीड़ी जला चुका था. मुझे हमेशा ही लगता है कि कुछ लोग बीड़ी पीते हुए अचानक से सुंदर हो जाते है ये उनके प्रति सम्मोहन है...