प्रेम में होना
ऐसे लोग बहुत सच मे बहुत कम होते है जिन लोगों से मिलने से कोफ्त होती है ।वह किसी से मिलता है तो आंखे न मिली होती है। जब अकेले होता है तो तरह-तरह के ख्वाब उसकी चारपाई के पास पसरे रहते थे ।वो हर दम सोचता रहता है कभी ये कभी वो बात बात उसे सबसे ज्यादा डरावनी लगने लगती थी और वह थी प्रेम।उसे लगता था कि प्रेम विद्रोह।प्रेम करना। से आदमी की आदमियत तो बढ़ जाती है किंतु फिर वह आदमी जल्द ही मर भी जाता है ।ऐसा वह इसीलिए कह रहा था क्योंकि उसने बहुत पहले सुना था कि यहां के किसी मकान बनाने वाले मजदूर को किसी शहजादी टाइप की लड़की से प्रेम हो गया था। और इस प्रेम के रंग बड़े अजीब होते थे।ऋतुओं और मौसमों से जो शहजादी के अलावा अपने आपको हमेशा गुलजार रखना जानती थी वो धीरे - धीरे पतझर में झरते पीपल के पत्ते की भांत पीली हो चुकी थी।काजल - भर जाने वाली आँखों में गुस्सा आया था.सम्मोहन और मुस्कान से सजने वाला उसके मुंह पर बेचैनी और बेसब्री उठ आया था।
उसे जब भी लगता है कि प्रेम करना इबादत करना ।वह इस के विषय मे सोचता और अगले ही क्षण प्रेम अपने अपनेतरथी घोड़ों के साथ उसे अलविदा लेता है।वह सोचता गांव के लड़के प्रेम नहीं जानता किंतु इस बात के लिए अगले क्षण वह ग्लिंक से है। भर जाता है। बबुल के सूखे थोथों की भांत वह अपने विचारों को स्थिर करता ही गया था। आशीष इसमें ईश्वर की ही सहमति थी कि उसे प्रेम न हुआ।
लेकिन जब भी वह अकेला होता है तो किसी के नाम को छू लेता है। वह नाम के उच्चारण को महसूसता जैसे उसकी दम भीतर फैल गयी ।किसी चेहरे के भीतर बन जाने से उसे लगता है कि वह इस दुनिया का ही नहीं था ....... अचानक गीत बजता ..... आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज है, आपको भी खस्तासूरत आपका अंजज है ......।

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