बेसब्री भरे दिन...

 पिछले तीन दिन किसी उदासी लिपटे बीत गए.कोई व्यक्ति है जो मेरे सारे अकाउंट्स के पासवर्ड जानना चाहता है.दिन भर इंस्टा वेरिफिकेशन के टेक्स्ट मैसेज आते है और फोन भरा रहता है.इन मेसेजेज की तादाद इस कदर है कि मैं मिटाने भी बैठूं एक घण्टा उसे मिटाने में लग जाता है.किसी गलती से अगर टेक्स्ट ओपन हो जाये तो पासवर्ड न जाने कैसे उसके पास चले जाते है.जैसे ही यह होता है मैं तुरन्त पासवर्ड चेंज करने को जाता हूँ. मैं सोचने लगता हूँ क्या साइबर क्राइम को कंट्रोल नही किया जा सकता.हालात ये है कि मैं मेरे फोन को लगातार एक घण्टे तक विद आउट फ्लाइट मोड नही रख सकता.कुछ दोस्तों के फोन आने से रह जाते है.घर वालों की बैचेनी बढ़ने लगती है.लेकिन मैं इन सबसे बचकर निकलना चाहता हूँ.न जाने क्यों और न जाने कौन है वो जो मुझसे इस तरह व्यवहार कर रहा है.

          कल्पना कीजिये कि आपकी सारी निजता यदि सार्वजनिक हो जाये.यूं तो निजी रूप से सहेजा जाए ऐसा कुछ भी नही है किंतु फिर भी एक चिंता बनी रहती है.मैंने किन दोस्तों से क्या बातें की है,किन हालातों में की है,मैं दिन भर फोन के गूगल को स्क्रोल करते हुए क्या खोजता हूँ,वह क्या है जिसे मैं दिन भर मिटाता रहता हूँ.ऐसी ही अनेकानेक चीजें मेरे साथ घटित होती है.ऐसा लगता है कि हम बहुत जल्द मर जाएंगे.मुझे अचानक शिव याद आ जाते है -: हम धीरे-धीरे स्लो-सुसाइड की ओर जा रहे है.

               प्रेम भरा सम्मोहन मानो भरभरा कर चूर हो गया और प्रेम की सारी किरचें जहां-तहां बिखर गई.उन्हें सहेजे जाने की जल्दी मैं उन्हें भूल आया.भीतर तक मौन चिल्लाने लगता है.

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